मेरे जीवन साथी
#प्रतियोगिता
विषय:- मेरे जीवन साथी
क्या कुछ बदला तेरे आने से मेरी जिंदगी में
कैसे कटी सुबह कैसे हुई रात तेरी मौजूदगी में
जहा मां के सौ गालियां देनी पर भी उठता नहीं था मैं
वाह तेरी चूड़ी की हल्की सी खनक से मेरी नींद टूट जाती है
कि जो सुबह की चाय लेने रसोई तक जाता था
अब वह चाय मुझे बिस्तर पे ही मिल जाती है
जहां आंख खुलते ही फोन होता था हाथों में
अब वहीं आंखे सुबह तेरी दरश को तरस जाती है
बहना के खिड़की खोलते जो धूप आंखो में पड़ती थी
अब वो धूप तेरे आंचल से छन जाती है
जहां मां के लाख समझाने पर भी मै मन्दिर में न जाता था
वहां अब मंदिर की घंटियों की आवाज से ही हाथ जुड़ जाती है
पापा के कहने पर भी जो काम करने ना जाता था
अब उनके बिन बोले ही ऑफिस जाने की जल्दी मच जाती है
जो ऑफिस में रहने पर घरवालों का भी फोन नहीं उठता था
अब काम के बीच भी रोज एक कॉल घर पे आ जाती है
जहां ऑफिस से छूटने पर भी घर देर से आया करता था
अब वहीं शाम होते ही घर की याद सताती है
एक निवाला खिलाने को मा सौ मिन्नते करती थी
वहां तेरे हाथो से एक निवाला खाने को दिल बेचैन हो जाता है
मुझे लगता था मां के जितना प्यार कोई कर नहीं सकता
पर तुम में तो दिखती मुझे उनकी ही परछाईं है
खुद ही में भरा हुआ था मै
तूने आ कर इस दिल में अपनी जगह बनाई है
क्या कुछ बदला तेरे आने से मेरी जिंदगी में
यार ये कैसी खुशी मैने पाई है
यार ये कैसी खुशी मैने पाई है
मेरे जीवन साथी तुझे पा कर ही ये जिंदगी पूरी हो पाई है।
नाम:- कल्पनाओं की कवियत्री (PG)
स्वरचित रचना
Gunjan Kamal
07-Dec-2022 09:04 AM
शानदार प्रस्तुति 👌
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Punam verma
01-Dec-2022 08:05 AM
Nice
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Abhinav ji
01-Dec-2022 07:39 AM
Very nice👍
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